इक़रार कर गया कभी इंकार कर गया; हर बात एक अज़ब से दो-चार कर गया; रास्ता बदल के भी देखा मगर वो शख्स; दिल में उतर कर सारी हदें पार कर गया

हम पर जो गुज़री है क्या तुम सुन पाओगे; नाज़ुक सा दिल रखते हो तुम रोने लग जाओगे; बहुत ग़म मिले हैं इस दुनिया की भीड़ में; कभी सुनो जो तुम इन्हें तुम भी मुस्कुराना भूल जाओगे।

तू देख या न देख, तेरे देखने का ग़म नहीं; तेरा न देखना भी तेरे देखने से कम नहीं; शामिल नहीं हैं जिसमे तेरी यादे; वो जिन्दगी भी किसी जहन्नुम से कम नहीं।

तुम भी कर के देख लो मोहब्बत किसी से; जान जाओगे कि हम मुस्कुराना क्यों भूल गए।