पढिए और चिन्तन किजिए…….. Motivation

एक मैदान में मेढक के बच्चो
की प्रतियोगिता चल रही थी एक 3 किलोमीटर लंबी रेस पूरी करके अंत मे 10 फिट ऊॅचे खंभे पर जम्प मारकर बैठ जाना था । जो भी रेस पूरी कर उस खंभे पर बैठ जाता,
विजेता घोषित होता । मेढक के छोटे -छोटे  बच्चे मैदान में लाईन से खड़े हों गए,  मैदान के बाहर बच्चों के माता -पिता
और अन्य दर्शक कुर्सियो पर बैठ गए । उन लोगों ने जब रेस की दुरी और खंभे की ऊँचाई देखी तो कहने लगे,  बहुत दुरी है,  छोटे बच्चे कैसे इतना दोड़ पाएगे । इनके छोटे पैर दुखने लगेगे । कोई इतनी दूर रेस पुरी कर भी ले तो  भी उस खंभे पर जम्प मारना तो नामुमकिन है,  । लोगों की बात सुनकर
कुछ बच्चो ने रेस शुरू होने से पहले ही नाम वापस ले लिया । थोड़ी देर बाद रेफरी ने सिटी बजायी और रेस शुरू हो गई ।
मैदान के बाहर से बच्चों के माता -पिता उनको उत्साहित कर रहे थे तो कुछ लोग जिनके बच्चे नाम वापस ले चुके थे । वे लोग नकारात्मक बातें कर रहे थे । “क्या जरूरत है , ऐसी लंबी और मुश्किल प्रतियोगिता की?  इसकी जगह छोटी रेस नहीं रख सकते थे?  ये बच्चे दोड़ तो रहे है पर पहुंच नहीं पाएगे । उनकी बातें सुनकर आधी रेस पुरी कर चुके कुछ बच्चो ने रेस अधुरी छोड़ दी और बाहर निकल गए । अब रेस मे कुछ ही बच्चे रह गए । दो तिहाई रेस पूरी होते – होते और बच्चे भी बाहर निकल गए । अब मैढक का केवल एक बच्चा अकेला रेस मैं  दोड़ रहा था ।
लोग उसको दोड़ता देख हँसी उड़ा रहे थे । ” जब इतने बड़े बच्चे रेस पूरी नहीं कर पाये तो ये क्या कर पायेगा?  ”
हमारे बच्चे क्या बेवकूफ थे जो रेस से बाहर निकल गए ?
ये थककर मर जायेगा,  वो बच्चा दोड़ता जा रहा था । बच्चा दोड़ता रहा । अगर ये रेस पूरी भी कर गया तो खंभे पर चढ़ नहीं पायेगा । ” इसके पैर दैखो कितने छोटे हैं  ? ”
बच्चा दोड़ता – दोड़ता खंभे के पास पहुँचा और एक छलांग में उसके ऊपर बैठ गया । वह रेस जीत चुका था । दर्शको में बैठे उसके माता – पिता रो रहे थे । वह नीचे उतरा । अपना ईनाम लिया और चला गया । सवाल ये है कि वह कैसे जीता  ? ?
असल में वह मैढक का बच्चा
” बहरा ” था । इसी तरह अपनी  जिंदगी मे भी लक्ष्य पर ध्यान रखना चाहिए और  नकारात्मक बातों के लिए बहरा बनना चाहिए तभी सफलता मिल सकती हैं । दोस्तों मेरी यह motivation की कहानी अच्छी लगी तो आप अपने दोस्तों के साथ शेयर जरुर करे………….